डाॅक्टर हसन रूहानी ने बुधवार को इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई से अपने मंत्रीमंडल के साथ मुलाक़ात के अवसर पर कहा कि परमाणु समझौते के संबंध में ईरान के संयम की एक सीमा है और वह दूसरे पक्षों की ओर से वचनों का पालन न किए जाने के मुक़ाबले में अपनी संपूर्ण कटिबद्धता को स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने ईरान और परमाणु समझौते के बाक़ी बचे सदस्यों की वार्ता की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि अगर वार्ताएं विफल रहती हैं तो ईरान अपने मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा। ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि बड़ी शक्तियां जानती हैं कि अगर ईरान के तेल निर्यात को बंद करने की कोशिश की गई तो फिर अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग पहले की तरह सुरक्षित नहीं रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ एकपक्षीय दबाव उनके हित में नहीं होगा और इससे क्षेत्र और संसार में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी।
राष्ट्रपति डाॅक्टर हसन रूहानी ने इसी तरह अमरीका के प्रतिबंधों के मुक़ाबले में ईरान की सरकार की नीतियों के बारे में कहा कि सरकार ने कच्चे तेल के बजाए तेल से बने उत्पाद बेचने की नीति अपनाई है और इसके लिए देश की मौजूदा रिफ़ाइनरियों को विकसित किया गया है जबकि नई रिफ़ाइनरियां भी बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ईरान पहले ही चरण में तेल, गैस और डीज़ल के क्षेत्र में आत्म निर्भर हो गया और उसने इनका निर्यात भी शुरू कर दिया जबकि बज वह पेट्रोल के मैदान में भी आत्म निर्भर हो चुका है और कुछ देशों को पेट्रोल का निर्यात भी कर रहा है।